भीम स्मरण-भीम स्तुती

भीम स्मरण

सकलं विज्जं विधुर ज्ञानं देव रुपं सुजिव्हं ।
निमल चिक्खु गभिर घोसं गौरवण्णं सुकायं ।।


अभय चित्त निभय कामं सुरत धम्मं सुपेम ।
विरत रज्जं सुजननेतं भीमराव सरामि ।
भीमरावं सरामि , भीमरावं सरामि ।।

भीम स्तुती


दिव्य प्रभरत्न तुं साधु वरदान तुं ,
आद्य कुल भूष तू भीमराजा ।।1।।


सकल विद्यापति, ज्ञान सत्संगति ,
शास्त्र शासनमति , बुध्दि तेजा ।।2।।


पंकजा नरवरा , रत्न स्वजन उध्दारा ,
भगवंत आमुचा खरा , भक्तकाजा ।।3।।


चवदार संगरी शस्त्र धरिता करी ,
कांपला अरि उरि , रौद्र रुपा ।।4।।


मुक्ती पथ कोणता , जीर्ण स्मृमि जाळीता
उजाळीला अगतिका , मार्ग साजा ।।5।।


राष्ट्र घटना कृति , शोभते भारती ,
महामानव बोलती , सार्थ संज्ञा ।।6।।


शरण बुध्दास । शरण धम्मास ।
शरण संघास मी भीमराजा ।।7।।

हिंदी अर्थ

भीम स्मरण

संपूर्ण विद्या के ज्ञाता, अनुपम ज्ञान से परिपूर्ण, देवतुल्य स्वरूप, मधुर वाणी।
निर्मल नेत्र, गंभीर वाणी, गौरवशाली वर्ण, दिव्य काया।

निर्भय चित्त, निडर स्वभाव, श्रेष्ठ धर्म का पालन करने वाले।
सांसारिक आसक्तियों से विरक्त, सच्चे नेता, ऐसे भीमराव को मैं स्मरण करता हूँ।
भीमराव को स्मरण करता हूँ, भीमराव को स्मरण करता हूँ।


भीम स्तुति

दिव्य प्रकाश रूपी रत्न, तुम साधु समान वरदान,
आदिकुल के गौरव, तुम ही भीमराव राजा।

सभी विद्याओं के स्वामी, ज्ञान की संगति करने वाले,
शास्त्रों के ज्ञानी, बुद्धिमान और तेजस्वी।

पवित्र आत्मा, रत्नस्वरूप, अपने जनों के उद्धारक,
हमारे सच्चे भगवान, भक्तों के रक्षक।

छुआछूत के विरोधी, शस्त्र उठाने वाले,
शत्रुओं के हृदय को कंपाने वाले, रौद्र रूपधारी।

मुक्ति का मार्ग दिखाने वाले, रूढ़ियों को जलाने वाले,
अज्ञानी जनों को प्रकाश देने वाले, सच्चे पथप्रदर्शक।

राष्ट्र निर्माण के कर्ता, भारत की शोभा,
महामानव कहलाने वाले, सार्थक उपाधि धारण करने वाले।

शरण बुद्धं, शरण धम्मं,
शरण संघं, मैं हूँ भीमराव राजा।

🙏 जय भीम! जय भारत! 🙏